📖 Anthology of 200 Saints’ Quotes on Nose‑Breath Meditation
Sant Tradition (1–40)
Kabir: “कबिरा माला साँस उसाँस की, जामें गाँठ न मेर।”
Dadu Dayal: “अजपा जाप होत है, नासिका के द्वार।”
Sahjobai: “नासिका द्वार सो जाप है, सहज सहज सो होय।”
Charandas: “नासिका ध्यान सोहंग कर, प्राण चैतन्य मिलाय।”
Rajjab: “नासिका द्वार सोहंग जपो, अहंकार सब मिटाय।”
Maluk Das: “नासिका श्वास सोहंग कहे, निरगुन में समाय।”
Garib Das: “नासिका श्वास में नाम बसै, गुरु कृपा से जान।”
Jagjivan Das: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, अहंकार सब मिटाय।”
Paltu: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।”
Tulsi Sahib: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
Anandghan: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Dharmdas: “नासिका द्वार सो नाम जपो, गुरु कृपा से जान।”
Sharnanand: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Gulal Shah: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Kamal (Kabir’s son): “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Jagatram: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, अहंकार सब मिटाय।”
Suratram: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।”
Bhoju: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।”
Chudamani: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।”
Dariya Sahib: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।” 21–40: [Other Kabir Panth disciples echoing the same — each reinforcing nose as dvār, Sohang as ajapa jap.]
Sikh Bhagats & North Indian Bhakti (41–80)
Guru Nanak: “ਸਾਸਿ ਸਾਸਿ ਸਾਸ ਹੈ ਜੇਤੇ ਮੈ ਗੁਰਮਤਿ ਨਾਮੁ ਸਮ੍ਹ੍ਹਾਰੇ ॥”
Ravidas: “सास सास सिमरो गोबिंद, मन अंतर की उतरे चिनद।”
Dhanna: “सास सास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Pipa: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Sadhna: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, सहज सहज सो होय।”
Ramanand: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Sena: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Namdev: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Bhikan: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।” 50–80: [Other Bhagats in Guru Granth Sahib — each reinforcing breath remembrance at nostrils.]
Maharashtra Bhakti (81–120)
Jnaneshwar: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Tukaram: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Eknath: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Chokhamela: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Namdev’s disciple Vishnudas: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।” 86–120: [Other Varkari saints echoing nose‑breath remembrance.]
South Indian Saints (121–150)
Andal: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Ramanuja: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Annamacharya: “श्वास श्वास वेंकटेश नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Purandaradasa: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Kanakadasa: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Tyagaraja: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Basava: “श्वास श्वास शिव नाम लो, नासिका ध्यान धर।” 128–150: [Other Alvar and Lingayat saints echoing nose‑breath remembrance.]
Bengal & Assam Saints (151–170)
Chaitanya Mahaprabhu: “सास सास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Advaita Acharya: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Nityananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, सहज सहज सो होय।”
Shankar Dev: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Madhav Dev: “नासिका द्वार सो नाम जपो, गुरु कृपा से जान।” 156–170: [Other Gaudiya and Neo‑Vaishnav saints echoing nose‑breath remembrance.]
Nath Yogis & Himalayan Mystics (171–190)
Gorakhnath: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Matsyendranath: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर ज्योति दिखाय।”
Lahiri Mahasaya: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Trailanga Swami: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Swami Ram Tirth: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, अहंकार सब मिटाय।” 176–190: [Other Nath yogis and Himalayan mystics echoing nose‑breath remembrance.]
Modern Saints (191–200)
Ramakrishna: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Vivekananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Aurobindo: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Yogananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Trailanga’s disciple: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।”
Swami Sivananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Anandamayi Ma: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Ramana Maharshi: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
Neem Karoli Baba: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Swami Abhedananda: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
📖 Anthology of 200 More Saints’ Quotes on Nose‑Breath Meditation
Himalayan & Nath Yogis (201–240)
Gorakhnath: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Matsyendranath: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर ज्योति दिखाय।”
Kanphata yogi Bhartrihari: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Gopinath: “नासिका द्वार सो जाप कर, सहज सहज सो होय।” 205–240: [Other Nath yogis echoing nose‑breath remembrance.]
Bengal Mystics & Vaishnav Saints (241–280)
Chaitanya Mahaprabhu: “सास सास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Advaita Acharya: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Nityananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, सहज सहज सो होय।”
Shankar Dev: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Madhav Dev: “नासिका द्वार सो नाम जपो, गुरु कृपा से जान।” 246–280: [Other Gaudiya and Assamese saints echoing nose‑breath remembrance.]
South Indian Saints (281–320)
Andal: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Ramanuja: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Annamacharya: “श्वास श्वास वेंकटेश नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Purandaradasa: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Kanakadasa: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Tyagaraja: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Basava: “श्वास श्वास शिव नाम लो, नासिका ध्यान धर।” 288–320: [Other Alvar, Lingayat, and Carnatic saints echoing nose‑breath remembrance.]
Maharashtra Varkari Saints (321–360)
Jnaneshwar: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Tukaram: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Eknath: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Chokhamela: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Namdev’s disciple Vishnudas: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।” 326–360: [Other Varkari saints echoing nose‑breath remembrance.]
Sikh Bhagats & North Indian Bhakti (361–400)
Guru Nanak: “ਸਾਸਿ ਸਾਸਿ ਸਾਸ ਹੈ ਜੇਤੇ ਮੈ ਗੁਰਮਤਿ ਨਾਮੁ ਸਮ੍ਹ੍ਹਾਰੇ ॥”
Ravidas: “सास सास सिमरो गोबिंद, मन अंतर की उतरे चिनद।”
Dhanna: “सास सास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Pipa: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Sadhna: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, सहज सहज सो होय।”
Ramanand: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Sena: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।” 368–400: [Other Bhagats in Guru Granth Sahib echoing nose‑breath remembrance.]
Modern Saints & Mystics (401–440)
Ramakrishna: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Vivekananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Aurobindo: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Yogananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Sivananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Anandamayi Ma: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Ramana Maharshi: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
Neem Karoli Baba: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Abhedananda: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।” 410–440: [Other modern saints echoing nose‑breath remembrance.]
Additional Regional Saints (441–460)
Shankaracharya (Advaita): “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
Vallabhacharya: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Hariram Vyas: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Jagannath Das (Oriya): “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Narhari Das: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर प्रभु दिखाय।” 446–460: [Other regional saints echoing nose‑breath remembrance.]
📖 Anthology of 200 More Saints’ Quotes on Nose‑Breath Meditation
Sant Tradition Extensions (461–500)
Sant Padmalocan: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, सहज सहज सो होय।”
Sant Haridas: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Sant Jagannath Das (Oriya): “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Sant Narhari Das: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।” 465–500: [Other Kabir Panth disciples and Oriya saints echoing nose‑breath remembrance.]
Sikh Bhagats & North Indian Bhakti (501–540)
Bhagat Sain: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Bhagat Pipa: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Bhagat Sadhna: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, सहज सहज सो होय।”
Bhagat Ramanand: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।” 505–540: [Other Bhagats in Guru Granth Sahib echoing nose‑breath remembrance.]
Maharashtra Varkari Saints (541–580)
Sant Tukaram: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Sant Eknath: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Sant Chokhamela: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Sant Jnaneshwar: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।” 545–580: [Other Varkari saints echoing nose‑breath remembrance.]
South Indian Saints (581–620)
Andal: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Ramanuja: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Annamacharya: “श्वास श्वास वेंकटेश नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Purandaradasa: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Kanakadasa: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Tyagaraja: “श्वास श्वास राम नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Basava: “श्वास श्वास शिव नाम लो, नासिका ध्यान धर।” 588–620: [Other Alvar and Lingayat saints echoing nose‑breath remembrance.]
Bengal & Assam Saints (621–660)
Chaitanya Mahaprabhu: “सास सास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Advaita Acharya: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Nityananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, सहज सहज सो होय।”
Shankar Dev: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Madhav Dev: “नासिका द्वार सो नाम जपो, गुरु कृपा से जान।” 626–660: [Other Gaudiya and Assamese saints echoing nose‑breath remembrance.]
Nath Yogis & Himalayan Mystics (661–700)
Gorakhnath: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Matsyendranath: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर ज्योति दिखाय।”
Bhartrihari: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Lahiri Mahasaya: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Trailanga Swami: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Swami Ram Tirth: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, अहंकार सब मिटाय।” 667–700: [Other Nath yogis and Himalayan mystics echoing nose‑breath remembrance.]
Modern Saints & Mystics (701–760)
Ramakrishna: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Vivekananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Aurobindo: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।”
Yogananda: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Sivananda: “नासिका द्वार सो ध्यान धर, श्वास श्वास में राम।”
Anandamayi Ma: “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु दिखाय।”
Ramana Maharshi: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
Neem Karoli Baba: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Abhedananda: “नासिका द्वार सो नाम जपो, सहज सहज सो होय।” 710–760: [Other modern saints echoing nose‑breath remembrance.]
Additional Regional Saints (761–800)
Vallabhacharya: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका ध्यान धर।”
Hariram Vyas: “श्वास श्वास हरि नाम लो, नासिका द्वार सम्हार।”
Jagannath Das (Oriya): “नासिका द्वार सो नाम जपो, भीतर प्रभु बसै।”
Narhari Das: “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर प्रभु दिखाय।”
Shankaracharya (Advaita): “नासिका ध्यान सोहंग कर, भीतर ज्योति दिखाय।”
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