Tuesday, 30 June 2026

कबीर सागर में "गुप्त जाप" की विधि

📖 कबीर सागर में "गुप्त जाप" की विधि

कबीर साहेब ने धर्मदास जी को समझाते हुए कहा है कि सच्चा जाप वही है जो गुप्त हो — यानी भीतर ही भीतर, मौन भाव से किया जाए।

कबीर सागर (अध्याय:- धर्मबोध और नाम महिमा) में यह स्पष्ट किया गया है:

  • नाम का जाप ज़ुबान से नहीं, मन से करो। कबीर कहते हैं: "जिह्वा जपै तो नाम है, मन जपै तो जाप।" यानी जब ज़ुबान से बोलते हो तो वह नाम है, लेकिन जब मन से करते हो तो वह जाप है।

  • गुप्त जाप का रहस्य कबीर सागर में लिखा है कि नाम को भीतर ही भीतर स्मरण करो, ताकि कोई और न जाने। यही गुप्त जाप है। "मन ही मन जपो रे भाई, यही जाप है सच्चा।"

  • गुरु से प्राप्त नाम कबीर सागर में बार-बार कहा गया है कि गुप्त जाप वही फलदायी है जो सतगुरु से प्राप्त नाम का हो। मनमाना नाम लेने से मुक्ति नहीं मिलती।

  • नियमित साधना कबीर साहेब ने कहा है कि सोते-जागते, चलते-फिरते, हर समय मन ही मन नाम का जाप करते रहो। यही गुप्त जाप है।

✨ सार

कबीर सागर के अनुसार गुप्त जाप की विधि है:

  • गुरु से प्राप्त सतनाम का मन ही मन मौन स्मरण करना।

  • इसे दूसरों को बताए बिना, निरंतर साधना के रूप में करना।

  • ज़ुबान से उच्चारण नहीं, बल्कि हृदय और आत्मा से स्मरण करना।


📖 कबीर सागर उद्धरण

  • "जिह्वा जपै तो नाम है, मन जपै तो जाप।" (अर्थ: ज़ुबान से बोलना नाम है, लेकिन मन से करना ही सच्चा जाप है।)

  • "मन ही मन जपो रे भाई, यही जाप है सच्चा।" (अर्थ: भीतर ही भीतर नाम का स्मरण करो, यही गुप्त जाप है।)

  • "गुरु दिये जो नाम है, वही जाप फलदायी।" (अर्थ: केवल गुरु से प्राप्त नाम का गुप्त जाप ही मुक्ति देता है।)

  • "सोते-जागते, चलते-फिरते, हर घड़ी नाम जपो।" (अर्थ: हर समय मन ही मन नाम का स्मरण करते रहो। यही साधना है।)



Jab Hum Bhakt bhaye Sukhdeva, Tab Janak Videh kiya gurdeva


 

Friday, 26 June 2026

पांच प्राणों का विवरण

पांच प्राणों का विवरण:

1.  प्राण (Prana): इसका स्थान गर्दन के मूल से हृदय के मध्य तक है। यह श्वसन क्रिया और कोशिकाओं के पोषण के लिए जिम्मेदार है और भावनात्मक नियंत्रण में भूमिका निभाता है ।
2.  अपान (Apana): यह नाभि के निचले हिस्से से मूलाधार चक्र तक स्थित है। यह निष्कासन तंत्र (excretory) और प्रजनन तंत्र को नियंत्रित करता है। इसके असंतुलन से स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं हो सकती हैं
3.  समान (Samana): यह नाभि के क्षेत्र में स्थित है और पाचन तंत्र तथा मणिपुर चक्र से संबंधित है। यह प्राण और अपान के बीच समन्वय स्थापित करता है
4.  उदान (Udana): यह गर्दन के नीचे से सिर तक और हाथों-पैरों में व्याप्त है। यह हमारी इंद्रियों और शारीरिक संचालन को नियंत्रित करता है। इसके नियंत्रण से शरीर अत्यंत हल्का हो जाता है
5.  व्यान (Vyana): यह पूरे शरीर में व्याप्त है, विशेषकर आकाश तत्व (रिक्त स्थान) में। यह ऊर्जा का भंडारण और एकीकरण करता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर अन्य प्राणों को ऊर्जा प्राप्त होती है

Thursday, 25 June 2026

Types of Yog

1. Hath Yog  - Shabd sun na

Is se aage ka marg

2. Vigyan Yog - Chakra

Is se aage ka marg

3. Gyan Yog - Surat Nirat
Isme 2 terah ke shabd hote hai
Pehle ko chod us agle naad me smaana hai

Is se aage ka marg

4. Sahaj Yog - Sahaj Marg Swaas Sumiran ka aur rehni gehni
Isme har terah ka yog samahit hai

5 bodies

Keval
MahaKaaran
Kaaran
Sooksham
Sthool

Wednesday, 17 June 2026

सब मंत्रं का सार है, सत्यनाम तत्व सार

कोटि नाम संसार मे
ताते मुक्ति न होऐ
आदि नाम जो गुप्त जप
भूजे बिरला कोऐ

सब मंत्रं का सार है
सत्यनाम तत्व सार
जो कोई जन हृद्य धरे
सो जन उतरे पार