Sahaj na chinhe koy.
Jin sahje vishaya taje,
Sahaj kahave soy.
Chinta mui manva mua,
manva taji vishay vishvaas,
Aa jiyate hi mukti hai,
Aa jiyate hi mukti hai,
jo sahaj rahe prabhu paas.
Dheeraj se sab kuch hot hai,
kaahu bhatkaaye hoye,
Mali seeche sau ghadha,
Mali seeche sau ghadha,
ritu aaye phal hoye.
Hari Hari kehta mai phira,
par Hari nahi milay,
Jab mai theher karr chup ho gayya,
to Hari laage peeche
Chinta mui manva mua,
manva taji vishay vishvaas,
Aa jiyate hi mukti hai,
jo sahaj rahe prabhu paas.
Ganit taji ke sahaj raho,
sahajai param tat hoi,
Ganit gane so sansari,
Sahaj rahe so koi. (leave calculations)
खिंचातानी में कछु नाहीं,
ढील दिए सुख होय,
प्रेम गली अति सांकरी,
तामें दो ना सोय।
चतुराई सूझै नहीं,
सहजै मिलै सो लेय,
कबीर मन मुतंग है,
कहुं कहुं भरम गहेय।
जब लग मेरी मेरी करै,
तब लग काज एकौ नहीं सरै,
जब मेरी मेरी मिटी जाय,
तब हरि काज संवारे आय।
सुमिरण मारग सहज का,
सतगुरु दिया बताय ।
सांस सांस सुमिरण करूं,
इक दिन मिलसी आय ।।
साधो सहज समाधि भली ।
जहं-जहं डोलौं सो परिकरमा,
जो कछु करौं सो सेवा ।
जब सोवौं तब करौं दंडवत,
पूजौं और न देवा ।।
जो कछु आवै सहज में,
सोई मीठा जान।
कड़वा लागै नीम सा,
जामें ऐंचातान ।।
साईं मेरा बणिया,
सहज करे ब्योपार ।
बिन डांडी बिन पालड़े,
तोले सब संसार ।।
सहज सहज सब कोई कहे,
सहज न चीन्हें कोय ।
जिन सहजै विषया तजै,
सहज कहावै सोय ।।
सहज मिले सो दूध है,
माँगा मिले सो पानी ।
कह कबीर जो ऐंचातानी,
जामे रकत समाना जनी ।
सहजै सहजै सब गया,
सुत बित लोक भेष ।
जब कबीर सहजै मिला,
तब कछू न रहा अंदेस ।।
सहज सहज सब कोई कहे,
सहज न जाने कोय ।
पाँचो राखे पसरतो,
सहज कहावे सोय ।।
सहज रूप को छोड़कर,
करैं अनेक उपाई ।
कबीर सहज के मिले,
सहजैं मिलैं गुसाईं ।।
सहज सहज ही सब गए,
मन मंसा के दाग ।
ज्ञान बिना जावै नहीं,
मन मनसा का दाग ।।
सोन समाना काँच में,
कंचन भया अकाज ।
कबीर सहजैं मिलि रहा,
ज्यूँ पानी में नाज ।।
सहजै ही धूनि लागी रही,
जागत सोवत सोय ।
कबीर दास साची कहै,
ताको जनम न होय ।।
सहज सुभाय जो मिलि रहै,
ताको मिलै खुदाय ।
खिंचातानी जो करै,
सो दरदर गोते खाय ।।
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