Thursday, 20 August 2026

ਕਬੀਰ, ਪਾਪ ਪੁੰਨ ਦੋਉ ਏਕ ਸਮਾਨ

सुमिरन विधी

🌼 सोहं का जाप

  • प्रक्रिया: हर श्वास के साथ "सो" और "हम" का अनुभव करना।

    • जब श्वास अंदर जाती है तो मन में "सो" का स्मरण।

    • जब श्वास बाहर आती है तो मन में "हम" का स्मरण।

  • अर्थ: "सोहम" का मतलब है — मैं वही हूँ (आत्मा और परमात्मा की एकता)।

  • विशेषता: यह जाप बिना जिह्वा (ज़ुबान) के होता है, केवल मन और सुरति से।

  • लाभ: साधक को भीतर अनहद नाद सुनाई देता है और मन स्थिर होता है।

🕉️ ॐ का जाप

  • प्रक्रिया: श्वास को उलटकर भीतर लाना और मन को ॐ ध्वनि में स्थिर करना।

    • जब साधक "सोहं" की डोरी पकड़कर भीतर जाता है, तब वह "ॐ" की धुन में लीन होता है।

    • यह जाप भी मौन है, केवल अंतर-ध्यान से होता है।

  • अर्थ: "ॐ" ब्रह्म का मूल नाद है, जो सब ध्वनियों से परे है।

  • विशेषता: जब "सोहं" और "ॐ" एक हो जाते हैं, तब द्वैत मिट जाता है।

  • लाभ: सहज समाधि, जन्म-मरण का भय समाप्त, और परम शांति की प्राप्ति।

✨ कबीर साहेब का संकेत

कबीर कहते हैं:

  • "सोहं सबद की डोरी पकड़, ॐकार के भवन में सुरति अचल धरि।"

  • यानी पहले श्वास-श्वास में "सोहं" का अनुभव करो, फिर उसे "ॐकार" में विलीन करो।

👉 संक्षेप में:

  • सोहं जाप = श्वास के साथ आत्मा-परमात्मा की एकता का स्मरण।

  • ॐ जाप = उसी एकता को परम नाद में विलीन करना।