Friday, 7 August 2026

सत् हरि भजन, जगत सब सपना

शंकर, ऊमा कहूं मैं अनुभव अपना। 
सत् हरि भजन, जगत सब सपना॥

~राम चरित् मानस

MaanSarovar, AmiSarovar, KabirSagar, SurtiSagar

Sunday, 19 July 2026

Sahjo Ajapa Gaytri Ka Ang

अनाहत नाद के 10 आयाम

हठ योग प्रदीपिका (Hatha Yoga Pradipika) के चौथे अध्याय में महर्षि स्वात्माराम ने ध्यान (नादानुसंधान) के दौरान सुनाई देने वाले 10 अनाहत नाद का क्रमबद्ध वर्णन किया है।
जैसे-जैसे साधक का ध्यान गहरा होता है और ऊर्जा (प्राण) सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश करती है, उसे ये सूक्ष्म आंतरिक ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं।
हठ योग प्रदीपिका में वर्णित 10 अनाहत नाद : 
  1. चिणी नाद (Chini): सबसे पहली सूक्ष्म ध्वनि जो एक पतली भिनभिनाहट या 'चिणी' (Chini) जैसी होती है।
  2. चिणी-चिणी नाद (Chini-chini): पहली ध्वनि से थोड़ी तीव्र और लगातार होने वाली झनझनाहट।
  3. घंटा नाद (Bell): मंदिर की घंटी या टंकार (Tinkling Bell) की गूंज।
  4. शंख नाद (Conch): शंख बजने जैसी गहरी ध्वनि।
  5. तंत्री नाद (Tantri/Lute): वीणा या सितार जैसे तंतु वाद्य यंत्र की मधुर धुन।
  6. ताल नाद (Tala/Cymbals): मंजीरे या करताल (Cymbals) के टकराने जैसी झंकार।
  7. वेणु नाद (Flute): बांसुरी (Flute) की मोहक और पतली आवाज़।
  8. भेरी नाद (Bheri/Drums): नगाड़े या भारी ढोल (Drum-blast) की गर्जना।
  9. मृदंग नाद (Mridanga): मृदंग या पखावज (Double drum) की थाप जैसी गूंज।
  10. मेघ नाद (Clouds/Thunder): अंत में, बादलों के गरजने (Thunder) जैसी अत्यंत गहरी और व्यापक ध्वनि।
हठ योग प्रदीपिका (श्लोक 4.84-4.85) के अनुसार, अभ्यास के शुरुआती चरण में भारी आवाज़ें (जैसे भेरी या गर्जना) सुनाई देती हैं, और अभ्यास के परिपक्व (Advanced) होने पर सूक्ष्म ध्वनियां (जैसे बांसुरी, वीणा) सुनाई देने लगती हैं।