Tuesday, 15 September 2026

Dadu Dayal about Kabir

साधो ऐसा देस हमारा

महरम होए सो जाने साधो ऐसा देस हमारा।

1. वेद कतेब पार नहीं पावत कहन सुनन ते न्यारा।
जात वर्ण कुल किरया नाहीं संध्या नेम अचारा।

2. बिन जल बूंद परत जिंहि भारी नहीं मीठा नहीं खारा।
सुन्न महल में नौबत बाजे किंगरी बीन सितारा।

3. बिन बादल जहाँ बिजरी चमकै बिन सूरज उजियारा।
बिना सीप जहाँ मोती उपजै बिन सुर षब्द उचारा।

4. जोत ले जाए ब्रह्म जहां दरसे आगे अगम अपारा।
कहे कबीर वो रहन हमारी बूझे गुरमुख प्यारा।

~कबीर

Shareer Shabad aur Swaas Kar

Monday, 14 September 2026

साचा सुमिरन नाम का, जो बावन अक्षर बाहर

कबीर सुमिरन बावन का, करे सो कैसे पार।
साचा सुमिरन नाम का, जो बावन अक्षर बाहर।।

Baawan Akshar Jore Aan

Kabir Sagar Ki Saadhna Vidhi Ka Poora Krama (Roadmap)

 

सोहंग श्वांसा भंवर गुफा में

इक्कीस हजार छह सौ श्वांसा, निस-दिन चलत प्रकाशा।

उलटि पवन सुखमन में लावे, अजपा उलटि ब्रह्म पद पावे॥


सोहंग श्वांसा भंवर गुफा में, ओंकार त्रिकुटी में जान।

दोई अक्षर मिलि करत पसारा, याही में अटके ऋषि-मुनि ज्ञान॥


सोहंग लोक पार जब जाई, तब सतलोक की झांकी पाई।

सोहंग तक जो सुरति समाई, सो तो काल मण्डल के मांही॥


स्वांसा छूटे, पवन ठहरावे, तब अनहद की धुन बाजे।

अविगत से जब सुरति मिलावे, तब सार शब्द मन गाजे॥


सार शब्द ऐसा आहि, जैसे चुम्बक लोहा खाहि।
सुरति को खैंचि लोक पहुँचावै, बहुरि न भवसागर में आवै॥

सोहंग कहे सो हम हैं भाई, यह तो अहं की बात लखाई।
जब लग 'हम' और 'सो' का फेरा, तब लग मिटै न भव का डेरा॥