Monday, 16 January 2023
Wednesday, 21 September 2022
निरगुण सरगुण दवन्द पसारा
कबीर, निरगुण सरगुण दवन्द पसारा ।
दोनो पड़ गऐ काल की धारा ।।
दादू, कोई निरगुण मे रीझ रहा,
कोई सरगुण ठहराऐ ।
दादू चाल कबीर की,
मोसे कही न जाऐ ।।
दोनो पड़ गऐ काल की धारा ।।
दादू, कोई निरगुण मे रीझ रहा,
कोई सरगुण ठहराऐ ।
दादू चाल कबीर की,
मोसे कही न जाऐ ।।
देही ज्ञान सब जगत बखाने
कबीर, देही ज्ञान सब जगत बखाने,
विदेही ज्ञान कोई बिरला जाने ।
ध्यान विदेह और नाम विदेहा,
दोऊ लख पावै मिटे संदेहा ।।
विदेही ज्ञान कोई बिरला जाने ।
ध्यान विदेह और नाम विदेहा,
दोऊ लख पावै मिटे संदेहा ।।
देखा देखी गुरमुख हो गऐ
कबीर, देखा देखी गुरमुख हो गऐ,
किया न तत्व विचारा ।
गुरू शिष्य दोनो के सिर पे,
काल ठोके पंजारा ।।
किया न तत्व विचारा ।
गुरू शिष्य दोनो के सिर पे,
काल ठोके पंजारा ।।
Saturday, 19 February 2022
सत का सबदु कबीरा कहै
- SGGS 343
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Wednesday, 3 November 2021
अजहूँ सो पहला दिन
कबीर, कहत सुनत सब दिन गए,
उरझि न सुरझ्या मन।
कही कबीर चेत्या नहीं,
कही कबीर चेत्या नहीं,
अजहूँ सो पहला दिन।।
हम तौ एक एक करि जाना
कबीर, हम तौ एक एक करि जाना।
दोइ कहैं तिनहीं कौ दोजग जिन नाहिंन पहिचाना ।।
एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समाना।
एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कोंहरा साना।।
जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।
सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई।।
माया देखि के जगत लुभांनां काहे रे नर गरबाना।
निरभै भया कछू नहिं ब्यापै कहै कबीर दिवाना।।
दोइ कहैं तिनहीं कौ दोजग जिन नाहिंन पहिचाना ।।
एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समाना।
एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कोंहरा साना।।
जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनि न काटै कोई।
सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई।।
माया देखि के जगत लुभांनां काहे रे नर गरबाना।
निरभै भया कछू नहिं ब्यापै कहै कबीर दिवाना।।
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