Thursday, 11 May 2023
हंसो सोहं सोहं हंसो बार बार उल्टात
निरंजन माला घट में फिरे दिन रात। टेक। ऊपर आवे नीचे जावे श्वास श्वास चल जात संसारी नर समझे नाही विरथा उमर विहात ।१। सोहं मंत्र जपे नित प्राणी बिन जिव्हा बिन दाँत अष्टपहर में सोवत जागत कबहुँ न पलक रुकात ।२। हंसो सोहं सोहं हंसो बार बार उल्टात सतगुरु पूरा भेद बतावे निश्छल मन ठहरात ।३। जो योगीजन ध्यान लगावें बैठ सदा परभात बृह्मानंद मोक्षपद पावें फेर जन्म नही आत ।४। निरंजन माला घट में फिरे दिन रात
Monday, 16 January 2023
Wednesday, 21 September 2022
निरगुण सरगुण दवन्द पसारा
कबीर, निरगुण सरगुण दवन्द पसारा ।
दोनो पड़ गऐ काल की धारा ।।
दादू, कोई निरगुण मे रीझ रहा,
कोई सरगुण ठहराऐ ।
दादू चाल कबीर की,
मोसे कही न जाऐ ।।
दोनो पड़ गऐ काल की धारा ।।
दादू, कोई निरगुण मे रीझ रहा,
कोई सरगुण ठहराऐ ।
दादू चाल कबीर की,
मोसे कही न जाऐ ।।
देही ज्ञान सब जगत बखाने
कबीर, देही ज्ञान सब जगत बखाने,
विदेही ज्ञान कोई बिरला जाने ।
ध्यान विदेह और नाम विदेहा,
दोऊ लख पावै मिटे संदेहा ।।
विदेही ज्ञान कोई बिरला जाने ।
ध्यान विदेह और नाम विदेहा,
दोऊ लख पावै मिटे संदेहा ।।
देखा देखी गुरमुख हो गऐ
कबीर, देखा देखी गुरमुख हो गऐ,
किया न तत्व विचारा ।
गुरू शिष्य दोनो के सिर पे,
काल ठोके पंजारा ।।
किया न तत्व विचारा ।
गुरू शिष्य दोनो के सिर पे,
काल ठोके पंजारा ।।
Saturday, 19 February 2022
सत का सबदु कबीरा कहै
- SGGS 343
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