Avigat Kabir
Thursday, 31 October 2024
Shabd bina surti aandri
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Kabir, Shabd bina surti aandri Kaho kahan ko jaye Dwar na paave shabd ka Fir fir bhatka khaye.
Tuesday, 29 October 2024
ज्ञान इतना सुना दिया, जैसे बालू रेत
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कबीर, ज्ञान इतना सुना दिया, जैसे बालू रेत। कहे कबीर मैं क्या करूं, जीव न समझा एक।।
निर्गुन आागे सर्गुण नाचं, बाजे सोहंग तूरा
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कबीर, निरगुन आागे सरगुन नाचं, वाजै सोहंग तूरा । चेला के पाँव गुरूजी लागैं, यहीं अचम्भा पूरा ।।
भय निमग्न निज रूप में, भूला साहेब रूप
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सदाफल, भय निमग्न निज रूप में, भूला साहेब रूप । अभिमानी अज्ञान से, मर्मत विविध स्वरूप ।।।
पाँच शबद पाँच हैं मुद्रा सो निश्चय कर जाना, आगे पुरुष पुरान निःअक्षर तिनकी खबर न जाना
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पाँच शब्द पाँच हैं मुद्रा काया बीच ठिकाना। जो जिहसंक आराधन करता सो तिहि करत बखाना।। शब्द निरंजन चाँचरी मुद्रा है नैनन के माँही। ताको जाने गो...
Sunday, 27 October 2024
मेरा तेरा मनुआ कैसे इक होई रे
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कबीर, मेरा तेरा मनुआ कैसे इक होई रे। मैं कहता हौं आँखिन देखी, तू कहता कागद की लेखी। मैं कहता सुरझावनहारी, तू राख्यौ उरझाई रे। मैं कहता तू...
मैं तो फिरुँ ढूंढता,अपने हीरे माणिक लाल
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कबीर, गोता मारुं स्वर्ग में, जा बैठूं पाताल । मैं तो फिरुँ ढूंढता, अपने हीरे माणिक लाल ।।
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