Avigat Kabir
Tuesday, 14 April 2026
सत्य गया पाताल में, झूठ रहा जग छाये
कबीर, सत्य गया पाताल में,
झूठ रहा जग छाये।
दो टके की पगड़ी,
छः टके में जाये।।
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