Avigat Kabir
Saturday, 19 February 2022
सत का सबदु कबीरा कहै
›
- SGGS 343 ਬਾਵਨ ਅਖਰ ਜੋਰੇ ਆਨਿ ॥ बावन अखर जोरे आनि ॥ The fifty-two letters have been joined together. ਸਕਿਆ ਨ ਅਖਰੁ ਏਕੁ ਪਛ...
Wednesday, 3 November 2021
अजहूँ सो पहला दिन
›
कबीर, कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन। कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन।।
हम तौ एक एक करि जाना
›
कबीर, हम तौ एक एक करि जाना। दोइ कहैं तिनहीं कौ दोजग जिन नाहिंन पहिचाना ।। एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समाना। एकै खाक गढ़े सब भांडै़ एकै कों...
संतो देखा जग बौराना
›
कबीर, संतो देखत जग बौराना। साँच कहौं तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना।। नेमी देखा धरमी देखा, प्रात करै असनाना। आतम मारि पखानहि पूजै, उनमें कछु ...
1 comment:
कबीर संगति साधु की कटै कोटि अपराध
›
ऐक घड़ी आधो घड़ी, आधो हुं सो आध। कबीर संगति साधु की, कटै कोटि अपराध।।
भला हुआ जो मेरी मटकी फुटी
›
कबीर, भला हुआ जो मेरी मटकी फुट गई , मैं पनिया भरन ते छूट गई।
नाता तोड़े हर भजे भगत कहावे सोय
›
कबीर, जब लग नाता जगत का, तब लग भगति न होय। नाता तोड़े हर भजे, भगत कहावे सोय।।
‹
›
Home
View web version